सऊदी अरब में गुरुवार को अरब राष्ट्राध्यक्षों और फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के प्रमुखों की बैठक मक्के में आयोजित हुई और शुक्रवार भी मक्के में ही इस्लामी सहयोग संगठन के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई। सऊदी अरब ने यह बैठक क्षेत्र के हालात और ईरान के विरुद्ध समस्त देशों को एकजुट करने के लिए आयोजित की है।
फ़ार्स की खाड़ी में तनाव ध्यान योग्य है। यह एसी स्थिति में है कि ईरान कि विरुद्ध अमरीका की धमकियों में वृद्धि होती जा रही है, ईरान ने दिखा दिया है कि वह सैन्य दृष्टि से अमरीका की हर प्रकार की धमकियों से मुक़ाबला करने के लिए तैयार है।
अमरीका के रणनीतिकारों ने देश की सरकार को ईरान के साथ किसी भी प्रकार के युद्ध से दूर रहने को कहा है और कहा है कि संभव है कि अमरीका ईरान के विरुद्ध युद्ध शुरु तो करने वाला हो किन्तु इस युद्ध को समाप्त करना अमरीक के बस में नहीं होगा।
अमरीकी सरकार विशेषकर ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ युद्ध के बारे में दी गयी चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि उसका ईरान के साथ युद्ध का कोई इरादा नहीं है।
ईरान के साथ युद्ध के बारे में ट्रम्प का पीछे हटना, वह विषय नहीं था जिससे आले सऊद राज़ी रहता। सऊदी सरकार ने हालिया वर्षों में ईरान के विरुद्ध सैन्य हमले के लिए वाशिंग्टन को उकसाने के लिए बहुत प्रयास किया किन्तु हालिया दिनों में उसे अमरीका और ईरान के बीच तनाव कम होता नज़र आया। इसी आधार पर वह सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारी आदिल अलजुबैर ने कहा कि सऊदी अरब ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहता।
सऊदी अरब की एक विरोधी महिला सामाजिक कार्यकर्ता मज़ावी रशीद ने जुबैर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यमन युद्ध में विफलता के बाद सऊदी अरब दूसरा मोर्चा खोलने की पोज़ीशन में नहीं है।